Santosh kumar koli ' अकेला' 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य रात 79970 0 Hindi :: हिंदी
रात अंधेरी क्या डरना, यह आनी- जानी। आते -जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी। मैं नहीं तो वह भी नहीं, जिसकी तुम करते आस। वहां तक जाने के लिए, बनना पड़ेगा मेरा दास। मेरी उपेक्षा कर न सका ऋषि, मुनि और ज्ञानी। आते- जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी। मेरे विकराल रूप से डर के, जो हो जाता है भयभीत। अनंत अंधेरे में खो जाता, हो जाती है मेरी जीत। मेरी छाती चीर के, आती है सुबह सुहानी। आते -जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी। रात अंधेरी क्या डरना, यह आनी- जानी। आते -जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी। जो मुझ में अपने क़दमों के, सही चिन्ह बनाता है। साहसी मांझी ही सागर में, अपनी मंज़िल पाता है। कांटो के पथ पर ही, फूलों की हंसती जवानी। आते -जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी। अंधेरे में रोशनी, दुख में सुख की राहें। जो सुख को ही जीवन समझे, दुख से जीव चुराएं। छाती चीर के नदिया करती, कश्ती की अगवानी। आते जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी। रात अंधेरी क्या डरना, यह आनी -जानी। आते -जाते कह जाती है, नित्य नई कहानी।