Join Us:
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक 20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें

बलि का बकरा

Santosh kumar koli ' अकेला' 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक बलि का बकरा 70192 0 Hindi :: हिंदी

एक सरल करील, नई कोंपल  नई शान।
चढ़ी जवानी गदरा रहा, चंचरीक करे रसपान।
मंडराने, गहराने से, मन बहुत ललचाया।
मेरी ज़रूरत सबको है, मिथ्या विचार मन में आया।
एक पौधा नीम का, करीर छांव उग आया।
बेबस, बेदम, बेगाना, पनाह करीर की पाया।
रक्षित, अक्षत करीर से, नीम हो गया बड़ा।
बुरी नज़र वालों को, नीम दिखता था खड़ा।
नीम बड़ा होते ही, करीर लगने लगा जंजाल।
कल तक थे निछावर सब,आज उसका है बेहाल।
देख जवानी नीम की, करी आंखों में खटका।
मुदित, फुनगित करीर का, कर दिया ‌झ
ट-पट झटका।
अहमियत बस  गई आंसू में, समझा दुनिया का भंवर।
चढ़ गया भेंट भलाई की, अलविदा कह गए भ्रमर।
समझ नहीं सका दुनिया की, यह रीत बुरी।
क्यों बंटवारे भलाई के, आती है हरदम छुरी,आती है हरदम छुरी।

Comments & Reviews

Post a comment

Login to post a comment!

Related Articles

शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो प्राप्त कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, असम्भ� read more >>
शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिले इच्छाओं की, आसमा read more >>
इच्छा शक्ति 🥀🥀 शक्ति जब मिले इच्छाओं की, जो चाहें सो हांसिल कर कर लें। आवश्यकताएं अनन्त को भी, एक हद तक प्राप्त कर लें। शक्ति जब मिल� read more >>
Join Us: