Ranjana sharma 04 Oct 2023 कविताएँ दुःखद बोझ ढो रही है# Google# 20802 0 Hindi :: हिंदी
दिल में एक बोझ
लिए ढो रही हूं मैं
साथ जिसका भी चाहा
उसका साथ ना पा सकी मैं
अंदर ही अंदर घुटन सी हो रही है
पर बयां भी कर ना पा रही हूं मैं
एक ऐसे भंवर में फंस चुकी हूं
खुद को निकाल भी ना पा रही हूं मैं
कांटे की तरह चुभन
हो रही है दिल में
पर ए चुभन भी सह रही हूं मैं
सोच कर भी रूह कांप उठती है
पर वो दर्द दिल में दबाए रखी हूं मैं
रोना भी चाहूं अगर
तो रो ना पा रही हूं मैं
ऐ कैसा मंजर है जिंदगी का
हर पल हर लम्हा बस
दर्द में ही जी रही हूं मैं
धन्यवाद