Meenakshi Tyagi 01 Jul 2023 कविताएँ दुःखद Mayuri chundawat, Pooja soni 25191 0 Hindi :: हिंदी
ए जिन्दगी! तूने जो भी दिया मैंने सहर्ष स्वीकार किया,
आशाओं से परिपूर्ण था हृदय पर तूने इसे निराधार किया,
आंखों में थे छलके आंसू फिर भी खुद को हंसा दिया,
अपने छीने सपने छीने और इच्छाओं को भी मार दिया,
राग द्वेष और ईर्ष्या छीनी, मन को साधु बना दिया,
एक क्रोध बचा था उसको भी अपने ही मन में दबा दिया,
तप ना देखा वर्षों का मेरा बस अवगुणों का आधार दिया,
अब शेष ही क्या है मेरे पास ए जिंदगी यह श्वाशों का तार,
जा यह भी तेरे नाम किया, यह भी तेरे नाम किया
और स्वयं को शून्य बना लिया स्वयं को शून्य बना लिया।।
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