Ranjana sharma 24 Sep 2023 कविताएँ दुःखद हार चुकी हूं मैं#Google# 38610 0 Hindi :: हिंदी
बहुत हार चुकी हूं मैं
कभी - कभी मन करता है
कि ऐसी नींद में सो जाऊं
और कभी उठ ना सकूं मैं
थक चुकी हूं खुद से ही मैं
अब ऐ खामोशी दिल की
सही ना जा रही है मुझसे
जी तो चाहता है चुप्पी साध लूं
पर अफसोस वो भी नहीं कर सकती मैं
ऐ भाग दौड़ की जिंदगी में
बस भाग ही रही हूं मैं
दिन ढल रही और रात बीत रही है
वक़्त गुज़र रहा है ,बस
थम सी गई हूं मैं
धन्यवाद