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जो चले गए वो अपने थें

Ranjana sharma 15 Jul 2025 कविताएँ दुःखद #google # dard bhari kavita # 15841 0 Hindi :: हिंदी

जो चले गए वो अपने थें
आंखों में कई सपने थें 
कोई अपनों से मिलकर 
जाने वाला था
तो किसी को अपनों से
 मिलने की जल्दी थी
आंखों में कितनी उमंगे थी
तो किसी को कुछ करने की आशाएं थी
मत पूछो वह मंजर कैसा होगा
जब आंखों के सामने सबकुछ घटा होगा
दिल थम सा गया होगा
सांसे रुक सी गई होगी
आंखों के सामने अपनों से
बिछड़ने का दुःख सौ टुकड़े 
दिल का भी किया होगा
जो बीता उस जाने वालों पर
उसका दर्द हमें कहां पता चला होगा
टूट गए कितने परिवार
बेबस हो गई होगी कितने मां बाप लाचार
जब यह खबर आया होगा
कि अब तो मौत के गले 
हमें लगना होगा....!!
      धन्यवाद

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