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झूठ का पुतला

Santosh kumar koli ' अकेला' 16 Jun 2025 कविताएँ समाजिक झूठ का पुतला 17809 0 Hindi :: हिंदी

कोई परोसता, 
पानी मिला -मिला। 
कोई ख़ालिस पिलाता, 
कोई झूठ में झूठ हिला- हिला। 
कोई झूठ जाम परसता, 
चखना खिला-खिला। 
कोई कैसे भी परोस देता, 
बिन शिकवा- गिला। 

कोई झूठ ज़हर में बुझा, 
कोई चासनी में लपेट। 
कोई सफेद झूठ, 
कोई साँच की लगा चपेट। 
कोई कल-बल से, 
कइयों के जन्म घुट्टी है पेट। 
कोई शिकार खोजता, 
कोई खुद बनता आखेट। 

बिन प्रशिक्षण, प्रेरणा, 
झूठों के पीर- सी महारत। 
मैं झूठ नहीं बोलता, यह सबसे बड़ा झूठ, 
है ज़मीनी हक़ीक़त। 
तराशने, तरमीम की तरक़ीब से, 
बना देते तर्क सम्मत। 
झूठे खाने, खिलाने वाले, 
झूठी मिठाई, झूठी पंगत।

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