Pravin Chaubey 08 May 2025 कविताएँ धार्मिक #Poerty#kavita#poeam#shayari# 21804 0 Hindi :: हिंदी
कभी फुर्सत में लिखूंगा,
वो तमाम खूबसूरत पल,
जो मेरी आंखों ने जिए थे,
मगर ज़िन्दगी की भीड़ में कहीं खो गए...
सोचे थे इक दिन
छत की मुंडेर पर बैठकर,
तेरी मुस्कान संग शाम गुजारूंगा —
पर ऑफिस की घड़ी में उलझे सपनों ने
वो पल भी छीन लिए…
कल वो बरसात भी आई थी,
भीग जाने को जी भी चाहता था,
पर छतरी थामे घर की जिम्मेदारियों ने
मुझे भीगने ही नहीं दिया...
कभी फुर्सत मिली तो लिखूंगा —
वो सारे अफसाने, जो जिए बिना ही मिट गए,
जिन्हें मैंने दिल में बहुत बार जिया,
मगर दुनिया के हिसाब से
वो कहीं खो गए.
कभी फुर्सत में लिखूंगा,
वो तमाम खूबसूरत पल,
जो मेरी आंखों ने जिए थे,
मगर ज़िन्दगी की भीड़ में कहीं खो गए...
- प्रवीण चौबे
I am the Restuarant Purchase Manager My hobby is writer...