आकाश अगम 27 May 2023 कविताएँ अन्य #poetry #akashagam #zazbat 31523 0 Hindi :: हिंदी
मैं अमीर हूं इतना कि अपने भीतर सारी दुनिया को पनाह दिए रहता हूं और ग़रीब हूं इतना कि अपने लिए ही जगह नहीं एक कोने भर भी!
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जीवन की इस आपाधापी में बिखरती जा रही श�...