Ranjana sharma 18 Sep 2023 कविताएँ दुःखद मैं#Google# 30680 0 Hindi :: हिंदी
डगमगा गई थी कुछ देर के लिए
पर अब संभल गई हूं मैं
जिसके पीछे भाग रही थी
वो एक परछाई है, अब समझ गई हूं मैं
उस रोशनी के पीछे भागी
जिस रोशनी के बाद अंधेरा ही अंधेरा था
अब ठहर गई हूं मैं
खुद को बहुत धोखा में रख ली
अब हकीकत को पहचान गई हूं मैं
एक खुशी पाने के लिए कई खुशी
कुर्बान कर रही थी अब जान गई हूं मैं
जो मेरा नहीं उसे अपना बनाने चली थी
पर मैं गलत हूं अब मान चुकी हूं मैं
धन्यवाद