Komal Kumari 23 Jul 2026 कविताएँ समाजिक 290 0 Hindi :: हिंदी
समय का चक्र है अजीब कल थी मुझ में नादानियां आज मुझ में जिम्मेदारियां है। कल थी मैं बच्ची आज मेरे बच्चे हैं। मैंने आज अपने बच्चों के जन्म प्रमाण- पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं कल मेरे बच्चे मेरे मृत्यु प्रमाण- पत्र पर हस्ताक्षर करेंगे। मेरे हाथ पकड़ कर बच्चे स्कूल गए हैं कल बच्चे मेरे हाथ पकड़ वृद्ध आश्रम छोड़ आएंगे। जिन्हें भेजा हमने स्कूल डायरी पर साइन कर व्हीकल साइन करेंगे हमारी पेंशन पर। वक्त का ऐसा चक्र है जिंदगी के शोर- शराबे में वह इतने मसरूफ हो गए हैं अपने ही घर में वह मेहमान जैसा हो गए। जिनकी जिम्मेदारियां के लिए आज हमने सब कुछ निछावर किया है कल वही हमारी जिम्मेदारियां को उठाने में कतराएंगे। जिनके जन्म होने पर हमने खुशियों से भरा जन्मदिन मनाया है वही हमारे मृत्यु के बाद मृत्यु भोज करेंगे। जिसे हमने अपने कंधे पर बैठ कर आज घुमाया है कल हमें चार कंधे पर लेकर अंतिम यात्रा करेंगे। जिसे हमने लाया दुनिया दिखाने के लिए कल वहीं इस दुनिया से हमें अलविदा कहेंगे। जिसके बचपन के एक-एक समान संजोकर सजाया गया है,वही कल हमारे चीजों का दान पूर्ण करेंगे। जो सजाए थे हमने वह अनदेखा ख्वाब कहां गए? संभाले थे जो अरमान आज वह बस यादें हैं जिंदगी के सफर में अब सात सिर्फ़ अपनी ही परछाई है समय के इस चक्र में, यही सच की सच्चाई है।
#Mujhko pasand hai khud Ko hi padhna ek kitab hai mujhmein Jo mujhe aajmati hai. @ham Apne jivan ka...