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सोने की अति

Santosh kumar koli ' अकेला' 27 May 2025 कविताएँ बाल-साहित्य सोने की बढ़ती कीमत 14929 0 Hindi :: हिंदी

सोना, 
तू क्यों नहीं रहा सोया? 
कच्ची नींद जागकर, 
कहांँ से कहांँ गया? 
सोना, 
तू सपने में आता। 
हाथ नहीं आए, 
दूर भागता। 
जब -जब, 
तू जागा, 
ग़रीब, मध्यम, 
ठगा, भागा। 
नींद में भी, 
उठ चल देता। 
ग़रीब को दे गच्चा, 
धनिकों का चहेता। 
क़ीमत तप्ति तृषा से, 
तुझे मिलती तृप्ति। 
बस, अब हो गई अति, 
सोच से परे, होगी तेरी गति। 
होगी तेरी गति।

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