Shubhashini singh 30 Mar 2023 कविताएँ अन्य Google /Yahoo/Bing /instagram/Facebook/twitter 69525 0 Hindi :: हिंदी
सारा सुकून छीन लिया एक औरत का सरा सुकून छीन लिया जो कभी एक काम ना करती आज दिन भर काम कर के भी ताने खाती जो मां बाप के घर लाडो से पली आज वो बेटी कही गुम हो गई जो छोटी छोटी बातो पर खुशी से उछल पड़ती आज उसकी आंखे नम हो गई जो मां बाप के घर कभी रानी बनकर रहती आज वो एक नौकरानी बन गई जो मां बात की एक डाट पर सारा घर सर पर उठा लेती आज वो हर गम सह गई सारा सुकून छीन लिया एक औरत का सारा सुकून छीन लिया क्या इसी को शादी कहते है क्यों नहीं समझा जाता उसे क्यों नहीं अपनी बेटी माना जाता उसे क्यों हर दुख दर्द उसके समझे नहीं जाते क्यों उसको भी कभी अपनी बेटी की तरह प्यार नहीं किया जाता.....