Chinta netam " mind " 30 Mar 2023 कविताएँ समाजिक 60372 0 Hindi :: हिंदी
# सुप्रभात
मनुष्य जितना अपना ,
जीवन जीता है
उस का उसको
अवश्य ही ,
अनुभव होता है....!
क्यों ना इतना ,
कर लेता बस ,
प्रेम नाम का ,
सुमिरन कर ले
शांति का
गुंजन होता है .....!
इससे मन
प्रफुल्लित ,
आनंदित
सब से संबंध ,
अच्छा होता है.....!
चिन्ता नेताम " मन "
डोंगरगांव (छत्तीसगढ़)