मानव तन के दो रूप,
प्रथम देह का- अंत।
दूजा है प्राण- अनंत,
पल दो पल का साथ।।
मानव देह गुण अनेक,
स्वयं का ज्ञान मूल।
अंत से अविनाशी तक,
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कहानी- "अनोखा बैर"
लेखक- जितेन्द्र शर्मा
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गोवर्धन चौधरी और बालकिशन मिश्र एक दूसरे के जन्मजात पड़ोसी थे। एक दूसरे के सुख-दुख में read more >>