# जिन्दगी .....
मध्यमवर्गीय जिंदगी ,
कर्जदारों की बंदगी
बंट गई है किश्तों में ,
आगे और कुछ नहीं ......!
चिन्ता नेताम " मन "
नगर पंचायत डों� read more >>
मंदिर में मूरत किस काम की है जब किसी के घर में रोटी ना शाम की है दिल दुखी है मन उदास है फिर पूजा किस काम की कोई रो रहारा मंदिर के बहार फिर � read more >>
तब लैंडलाइन फोन का जमाना था। एक दिन मेरा पड़ोसी मेरे घर आया और दर्दभरे लहजे में बोला, "मेरा फोन काफी दिनों से डेड पड़ा है। सूं-सां...सां...सां read more >>
हर घर की शान है
बुजुर्गो से ही हम बच्चो की पहचान है।
इनकी छवि जैसी होती है,
वैसे ही हमारा स्वरूप भी बनता है,
तभी तो लोग कहते है कि तू अपन� read more >>
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परिदे घर से निकले हैं,
ढूढने नए से निकलें हैं,
अपने झुझ के बीच में,
ढूढने अपना अभिमान,
थके हारे लगे रहते हैं,
पाने पूरा आसमां को read more >>