ये फिजायें कह‌ रहीं कुछ
इनसे भी कुछ सीख लो।
दिल को गम से दूर कर दो
प्यार करना सीख लो।
ऐसा कोई काम कर तू
हर कोई सागिर्द हो।
हर किसी के read more >>
‘‘अमा यार, तुम्हें मालूम है! आज मेरे घर साधुओं की फौज आई थी।’’ राजेश ने सहकर्मी गौतम से कहा।
गौतम ने अनमने ढंग से जवाब दिया,‘&lsquo read more >>
‘‘यार, कैसे मर्द हो, जो दारू तक नहीं पीते! क्या अपनी बीवी से डरते हो?’’ सहकर्मी ने बीयर बार में प्रवेश की ओर निगाह डालते हुए तानेकश read more >>
दीपावली के अवसर पर बनवारीलाल अपने घर के ड्राईंग रूम को सजाते हुए सोच रहा था, ‘‘क्या है उसके पास? न ढंग के सोफे, न अच्छी कुर्सियां, न आल read more >>