बचपन आज यह सोच रहा
कहाँ खो गया आज वो
खुद अपने को खोज रहा
बस्तो के नीचे दबा हुआ
सोने के समय जगा हुआ
भाग दौड़ के इस समय में
वो समय के पीछे खो read more >>
(कविता) बेरोजगार की आवाज ....
गांव गली शहरो मे चर्चे आम हो जाए,
सत्ता धारी द्वार खोले तो हम तेरे हो जाए,
तुम्ही हो भाषण, तुम्ही हो ताली,
त� read more >>
तुम वीर हो...
न मानो तो तुम कायर, तीर हो,
तुम मानो तो विश्व की तस्वीर हो,
तुम वीर हो राजवीर हो...
सब कुछ बिखरा है इधर उधर,कई किरदार छूटे ह� read more >>
-: नशे मे गांव 😔
कहर ढाया, मातम छाया, देखो गांव को ये क्या हो रहा,
जमकर खून रगों मे जी सूख गया... आजकल के जवानों के
मिल जाती बेकार जवानी, नाल� read more >>
पतित को क्षमा कैसी |
पतन में अग्रसर जो हो,
क्षमा के योग्य हो न हो
क्षमा करने में पर एक बार,
न कोई हर्ज़ है ऐसी
पतित को क्षमा कैसी|
मगर जो ह� read more >>