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ज़िन्दगी जो कि शुरुआत मैंने ख्वाबों का बना घरौंदा, किया उसमे निवास मैने। कामयाबी का चूना रास्ता आसान मैने पढ़ने के सिवा किया नही कोई का read more >>
मैं समय हूंँ। मैं हूं सबके पास, पर किसी का भी नहीं हूंँ मैं समय हूंँ। मैं वही हूंँ, जिसने राजा को बनवास दिला डाला मैं वही हूंँ, जिसने मह� read more >>
जब लड़की की विदाई हो जाती है तब एक वक्त ऐसा भी आता है कि उसके घर का गेट दुनिया भर के लिए खुला रहता है लेकिन उसके लिए खुला रहकर भी बंद रहता � read more >>
जब आप ऊंचाइयों का शिकार चढ़ते हो तब दूर के लोग ताली बजाते हैं और पास के लोग आपके गिरने का प्रार्थना करते हैं और जब आप ऊपर चले जाते हो तब व read more >>
समाज में तो लोग हैसियत देखकर चरित्र प्रमाण पत्र दिया करते हैं अक्सर है सियत वालों का चरित्र प्रमाण पत्र बिल्कुल साफ हुआ करता है यह त� read more >>
जब हम गरीब होते हैं तो हमारे अंदर लोग लाख बुराइयां गिनाते हैं और जब हम अमीर हो जाते हैं तब लोग गिनती भूल जाते हैं और हमें सीधा महात्मा � read more >>
वरिष्ठ नागरिक जीवन गति उदगार बताने, याद दिलाने, , ठहरी जिन्दगी को गति देने आया हूँ II आँखों की लुप्त हुई रौशनी को रौशनी, बंद read more >>
बचपन आज यह सोच रहा कहाँ खो गया आज वो खुद अपने को खोज रहा बस्तो के नीचे दबा हुआ सोने के समय जगा हुआ भाग दौड़ के इस समय में वो समय के पीछे खो read more >>
यह है विषमता का जाम। पी -पी पागल हो रहे, दुनिया के लोग तमाम। जो गंवार हैं, वे शुद्ध गंवारू रूप में पीते हैं। पढ़े-लिखे थोड़ा, पानी मिला ल read more >>
कविता (आज बचा कुछ भी नही) थोङे ख्वाब ,थोङी हकीकत, थोङे सवाल, थोङे जवाब, समझने-समझाने मे गुजर गई उम्र सारी, आज बचा कुछ भी नही ।। कुछ अपने read more >>
(कविता) बेरोजगार की आवाज .... गांव गली शहरो मे चर्चे आम हो जाए, सत्ता धारी द्वार खोले तो हम तेरे हो जाए, तुम्ही हो भाषण, तुम्ही हो ताली, त� read more >>
कविता:-  क़िताबों का दुर्भाग्य.. रुसवा होकर करी बड़ाई ,फिर विरह अग्नि में देह जलायी मीत गया प्रदेश, सहेलिया धुँआ सू आँख गवायी , धूल मिट्� read more >>
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