✍️#कर्म का फल*
♦️👇👇👇
एक गाँव में एक सुनार का घर था। उस सुनार का काम बहुत अच्छा चलता था। काम बढ़ाने के उद्देश्य से उसने एक दिन बहुत सार read more >>
हो कितनी भी गुस्सा वो!
ख़ुद ही मान जाती है!!
छोटी हो तो चंडी !
बड़ी हो तो दुर्गा कहलाती है!!
भाई भाई की रट वो लगाती है!
दिन भर पकात� read more >>
हूँ ज्ञान का सागर मै!
तुझे श्रेष्ठ कैसे मान लूँ!!
हूँ गलत लाख मै फिर भी!
अपनी गलती कैसे मान लूँ!!
हैं तजुर्बे मेरी उम्र जि� read more >>