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कविता, साक्षरता मिशन
सब पढो आगे बढो। शिक्षा का सही उपयोग करो। सदैव शिक्षा का सम्मान करो। शिक्षा से ही मानव महान बने। हर कार्य में सहायक शिक्षा। शिष्टाच
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जीवन एक संघर्ष।
जीवन एक संघर्ष। मेहनत करो तो अर्श। ना करो तो फर्श। दोनों का सामना करो तोगर्व। जीवन में कुछ नया करो। अलग करो कुछ अलग करो। सही करो या �
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मदद करते रहिए
ग़रीबों को नहीं, ग़रीबी को दूर करते रहिए। जब तलक ज़िन्दगी है, सबकी मदद करते रहिए। इनकी ज़ुबान नहीं होती, मग़र ये दिल से दुआ देते हैं; आ�
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सुधराई- सफ़र
न ज़रूरत न हसरत, दूसरों को बदलने की। ज़रूरत व हसरत है, खुद के सुधरने की। वे तो न सुधर सके, उनका कोई ख़ता नहीं। सुधारने के फेर में, खुद कित�
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कभी हार नहीं होती
खिलखिलाती चेहरे से बेहतर कुछ और नहीं होती, मेहनत करनी वालों की कभी हार नहीं होती।
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मंजिल
रास्ते तो लोग बता सकते है लेकिन मंजिल तुम्हे खुद की मेहनत और जुनून से ही मिलेगी.....
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क्या जरूरी है
क्या जरूरी है आज के जमाने में क्या जरूरी है किसकी सुना जाए खुद की या दुनिया वालो की खुद की करू तो दुनियां धिक्कारे और दुनियां की सूनू
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जिक्र गमों का
जिक्र जब गमों का हो तो अपने लबों को खामोश रखना, क्यूंकि यहां लोग मदद कम तमाशा ज्यादा करते हैं.........
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ये मेरा हक है
बड़े प्यार से, मां के गोद में, बैठे बैठे पूछा गीले बिस्तर पर क्यों सोती मुझे सुलाती सूखा तीखा तीखा लात मरता तुझको लगता मीठा खाना खाती म
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व्यापार
कहीं थम गई सांसे कहीं कोई बर्बाद हुआ कहीं जीवन पूरा ठहर गया कहीं कोई आबाद हुआ !! कहीं मांग का सिंदूर मिटा कहीं आँखो का टूटा तारा कहीं �
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जिस्म थे,नुमाइश थी,दिखावट थी सब ओर
जिस्म थे नुमाइश थी दिखावट थी सब ओर असल चीज गायब थी बनावट थी सब और खानदान ही खानदान के खून का प्यासा था रोजी रोटी के झगड़े थे अदावत थी स�
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कविता, घर जा रहे प्रवासी।
घर जा रहे प्रवासी। कितने भुखे और प्यासे। इतना पैदल चल रहे हो। की पाँव में पड़ गये छाले। वेग और झोला हाथ मे। छोटे बच्चों को लेकर माँ।
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