ईमान बेच चुके हैं, न जाने किस लाचारी में
खड़े हैं दो-चार, उस मक्कार की तरफ़दारी में
जिधर मिले मुनाफ़ा , उधर ही ढुनक जाते हैं
दो-चार बैंगन ऐस� read more >>
हिंदी मेरी श्रेय है,
हम सबको बहुत प्रिय है,
हिन्दी मेरी जान है
हम सबका सम्मान है,
हिंदी सुखो का भण्डार है,
हम सबके जी का एक आधार है,
हिन्� read more >>
अब मैं भी कुछ कहना चाहती हूं अपने अंतर्मन की ,
अपने भावनाओं की ,
अपनी उलझनों की ,
अपनी परेशानियों को ,
अपनी दुविधा को ,
हर पल हर समय,
मन मे� read more >>