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अगर हाथों में आई तेरी नाकामी
अगर हाथों में आई तेरी नाकामी तो यह मत समझ तू काबिल नहीं ये तेरे सब्र की इम्तहान है समझ, मंजिल पाना है तुझे प्रयत्न की सीढ़ियां चढ़ते जा
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रंक को राजा
दिल के झरोखे में एक ख्वाब सजा रखा था, खिल उठे चेहरे पे एक नूर सजा रखा था, समानों के झुरमुट में रंक को राजा बना रखा था, मनचाही मुरादों में �
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मेरे मुस्कुराने में
वफ़ा तो बहुत की मैंने, इस जमाने में, मगर किसी ने भी नहीं रखें, ख्याल मेरे मुस्कुराने में।
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देश की दशा
देश के उन्नति खतिर, ऐ लोग कुछ नहीं करते हैं. बस कुर्सी पाके , अपनी ही झोली भरते हैं..|
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ibaadaton ki duniya me khoya ho jaise
इबादतों की दुनियाँ मे खोया हो जैसे वो सोया था ऐसे फरिश्ता सोया हो जैसे उसके पत्तों से शबनम ऐसे झड़ती थी रात भर वो दरख़्त अकेले रोया �
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जमाने के रंग हजार
चेहरे पर चेहरा लगा है, जमाने के रंग हजार है, कैसे पहचानें असली चेहरे को, लगाते नकाब है।
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अफगानी बाला
अफगानी बाला मृग सी चंचल लाचार निगाहों में इक्कीसवीं सदी की बेबस माँ की बाँहों में अफगानी हर बाला की अस्मत को लुट ते देख। विश्व �
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दुनिया के रंग
उल्टी दिशा, उल्टी बयार। हे दुनिया, तेरे रंग हज़ार। आतंकवादी, शांति का पाठ पढ़ाते हैं। रिश्वतख़ोरी खून में, ईमानदारी सिखाते हैं। गद्द
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कविता, नहीं सुरक्षित आज के नारी।
नहीं सुरक्षित आज के नारी। कदम कदम पर अत्याचारी। कभी ब्लैकमेल कभी फरेब के मार। कभी हो जाये यौन उत्पीड़न का शिकार । आज के नारी इस जग मे
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आरजू की जंग
आरजू की हद हो गई, विचारों ने संग्रह में धावा बोला। चाहतों के फूल ने खुशबू बिखेरी, हद यह खेल मजाक हो गया। रंग_बेरंग सी मन हो गया, उलझनों न
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बंजर करके छोड़ेगा
और कितना बवंडर करके छोड़ेगा वक़्त क्या सब खंण्डहर करके छोड़ेगा हाकिम खुश है अपने फैसलों पर लगता है सब बंजर करके छोड़ेगा ये क्या कम �
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शेर
जिंदगी है कोई मागा हुआ अखबार नही जाइये और कही यहाँ कोई बाज़ार नही इंतिहा देते हुऐ उम्र बीत गई आधी फिर भी नाकामियो का कोई बफादार नही लो�
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