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मरता क्या नहीं करता-जिन्दगी है यह इसके रूप अनेक
मरता क्या नहीं है करता, जिन्दगी है यह इसके रूप अनेक। किसी पर कब हो जाए मेहरबान, किसी पर कब हो जाए नाराज। जीवन भर लेती रहती कठि
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परिवर्तन संसार का-सुनो नियम है पार्थ
दोहा छंद परिवर्तन संसार का, सुनो नियम है पार्थ। खाली हाथ आए यहां, जाना खाली हाथ।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह ✍️ जिला;'समस्तीपुर(
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सुख दुख हैं मेहमान जी- स्वागत करना काम
दोहा छंद सुख दुख हैं मेहमान जी,स्वागत करना काम। दो ही पहलू सत्य है,कभी सुबह तो शाम।। सुख दुख हैं मेहमान जी, सही सिखाते मर्म। सुख में भ�
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जलने लगे अलाव अब ठंढ़ी चारों और-थड़थड़ हैं तन कांपते
दोहा छंद जलने लगे अलाव अब,ठंढ़ी चारों और। थड़थड़ हैं तन कांपते, नहीं बंधते कौर।। जलने लगे अलाव अब,अमृत तुल्य है आग। बिना आग के जल नही�
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दूर रहे भ्रम तब सदा-पालें नहीं तनाव
दोहा छंद दूर रहे भ्रम तब सदा,पालें नहीं तनाव। जीवन शैली स्वस्थ हो,गहरा शयन बचाव।। (स्वरचित मौलिक) संदीप कुमार सिंह✍🏼 जिला:_समस्तीपु�
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मेरे अपने लोग सब काफी हैं मजबूत- मेरे आते काम में दौलत जिसे अकूत
मुक्तक छंद मेरे अपने लोग सब, काफी हैं मजबूत। मेरे आते काम में, दौलत जिसे अकूत। इसका मुझे गुमान है,मन भी है गुलजार- आस रखा हूं और
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जीवन का महत्व-दिलों में दयालुता और करुणा
💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *प्रेरक कहानी* *~~~ #जीवन_का_महत्व ~~~* 👌प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर.... करण सिंह👌 💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐💐 *एक प्
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मेरे अपने लोग अब रहते हमसे दूर-कल तक थे साथ में आज हुए मगरूर
दोहा छंद मेरे अपने लोग अब, रहते हमसे दूर। कल तक थे साथ में, आज हुए मगरूर।। मेरे अपने लोग ही, हुए बेवफा आज। थे मेरे अहसान पर, अभी ह
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आओ साल का करें विदाई-जो आज पुराना नया कभी था
आओ साल का करें विदाई जो आज पुराना, नया कभी था कदम मिला कर ,चला वही था फिर कैसे ना,गम उसका हो आंखे भी नम ना सबका हो छोड़ चला है आज हमें वह �
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ब्रह्माण्ड भव्य है और बहुत भव्य निःसंकोच मित्रता
ब्रह्माण्ड भव्य है और बहुत भव्य इससे मित्रता की जा सकती है निःसंकोच बस जरूरत है दुर रहे हम नकारात्मक विचारों से और विकसित करे सकारात�
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लाठी-कभी तुम्हें हमेशा साथ लिए फिरते थे
कभी तुम्हें हमेशा साथ लिए फिरते थे। वो एक बास की थी लाठी जो हमेशा रहती थी साथ तुम तो इस युग के हो , तुम्हे तो आती होगी अ�
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मत आना इन मीठे वचनो में-वे बहकी बहकी बाते करते
लोगों के मृदु वचनो से तुम , घुल हदय मत बह जाना तुम । कोई नहीं भर सकता है , तेरे मन की झूठी तृप्ति निहित रहा �
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