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याद है वो दिन-किस्से बचपन के बड़े अनूठे
किस्से बचपन के बड़े अनूठे है बातो-बातो में हम तुमसे रूठे है कुछ पल खामोशी छा जाती थी फिर कुछ पल के बाद खामोशी लुप्त हो
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मेरे मन की पीर को-करो प्रेम सब देश से
(कुंडलिया छंद) मेरे मन की पीर को,समझो मेरे यार। करो प्रेम सब देश से,आपस में हो प्यार।। आपस में हो प्यार,वतन पे हम हैं मरते। बनूं धार तलव
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जाना सबको एक दिन-क्यों लड़ते हो यार
(दोहा छंद) जाना सबको एक दिन,क्यों लड़ते हो यार। जाएगा सब छोड़ कर,जीवन है उपहार ।। जाना सबको एक दिन,कर लो सबसे प्यार। याद करे संसा�
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झोळी-फाटकी झोळी दारी आली कामा पूर्ती मामा झाली
फाटकी झोळी दारी आली, कामा पूर्ती मामा झाली . चोर चोर बग कोण? सरकार आली, सरकार आली . मी नाही देश प्रेमी , आहे सैनिक पुजारी, कारण देशाला खाणा
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बेटी या बहु-घर घर की कहानी
★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★■◆★ *प्रेरक कहानी~~💐💐*"बेटी या बहु"*~~💐💐 *कहानी घर घर की* 👌प्रस्तुतकर्ता-सपनों का सौदागर....करण सिंह👌 ★■◆★■◆★■◆★�
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छात्रावस्था-कुछ बरस तक कुछ समय तक हम साथ थे
कुछ बरस तक कुछ समय तक हम साथ थे । बटँ गये राह क्योंकि सबके मंजिल अलग - अलग थे। जो आसपास के थे
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अपनापन-जो छोड़ गये तुम को तुम क्यो उनको अपना कहते हो
आत्मीयता खोकर भी तुम अपना कहते हो । जो छोड़ गये तुम को तुम क्यो उनको अपना कहते हो । जिन्हें प्रेम नहीं ह�
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बाँट-जो एक जीवन भर अन्त समय में में बाँटा
पले बढ़े जिनके आगे जिनकी गोदी मे खेले क्या वस्तु है वे कोई जो उनको बाँटा जाता है। खण्ड - खण्ड हो जाता उर , जब द�
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पूर्ण सत्य के पथ पर-जुर्म के खिलाफ उठ जाते है कई शख्श
जब भी बोलता हूँ मैं जुर्म के खिलाफ , उठ जाते है कई शख्श मेरे खिलाफ । देख रहे है जन अधरो पर हाथ धरे , मौन सभी बैठे है हाथो पर हाथ धरे
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घड़ी की फितरत
घड़ी की फितरत ही अजीब है हमेशा टिक टिक करती हैं मगर ना खुद टिकती हैं और ना दूसरे को टिकने देती हैं ।।
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झूठ-झूठी दुनिया झूठे लोगो को छोड़ा हो जाओ तुम भी सत्यनिष्ठ
मुझसे बच सका न कोई क्या मुझसा नहीं कोई चाहे जो कहते हो खुद को सतनिष्ठ पर बोले है कभी कही पर झूठ बुलताती ह
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विचार -उद्भ्रमण आरोहावरोह मन में
उग्र, उद्विग्न भाव, आरोहावरोह मन में। कस्तूरी मृग ज्यूं, भटके कानन में। संयुग्मन, पुनरागमन, वासर, स्वप्न में। वामन से दानव, दानव से व�
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