रो रहा है दिल मेरा आंखो से अश्रु की जल धारा बह रही है,
देखकर आज गौ-माता की यह हालत मुरली वाले तेरी याद आ रही है,
द्रापद में जो तेरी मुरली क� read more >>
दिल दुःख ही रहा जब कान ने यह सुना,
आंखो से पानी का झरना बहता रहा,
इंसान कैसे इतना राक्षस बन गया,
जिसे प्यार करा उसका कत्ल भी कर दिया ।।
र� read more >>
काऊ कोऊ प्रियतमा से तौऊ बिन जिव नौऊ भय!
लागु मन ताऊ से जिव अब काऊ भय!!
मझताऊ थाऊ से मै तौउ न पेऊ!
आवु मै घिरी-घिरी जाऊ न पेऊ!!
अर्थ:-
कहने read more >>
कविता - ( खिलवाड़ )
वहशी ने किया शिकार !
हद कर दी सारी पार !!
मानवता हुई शर्मसार !
इंसानियत हुई तार - तार !!
शायद रोया होगा महाकाल !
नाम का तो र� read more >>