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शीर्षक - पीड़ा उत्साह की न जाने क्यों? खुशी के वजू, उत्साह को पीड़ा होती है। जब ये निशा रोती है, जब जब वर्षा होती है। न जाने क्यों? कह द� read more >>
जिनके होंठों पर हमेशा मुस्कान रहे उसकी आंखों में आज भी पानी हैं जिसका जी चाहता खेलता है उसके यौवन से क्या औरत की यही भाग्य कहानी है । read more >>
काऊ कोऊ प्रियतमा से तौऊ बिन जिव नौऊ भय! लागु मन ताऊ से जिव अब काऊ भय!! मझताऊ थाऊ से मै तौउ न पेऊ! आवु मै घिरी-घिरी जाऊ न पेऊ!! अर्थ:- कहने read more >>
कब तक करूंगी मैं आपका इंतजार सब्र मेरे दिल का टूटे सनम हर एकबार। धन्यवाद read more >>
ये कैसे संसार में हम जी रहे हैं, जहाँ ने संवेदनाएँ हैं और न लगाव ना किसी का दर्द हमे महसूस होता हैं और ना किसी की ख़ुशी हमसे बर्दास्त, भर read more >>
रोने पर वो मेरे मुझे गोद में उठाती अपना खाना छोड़ कर वो मुझको तो खिलाती खेलने को मांगू कुछ तो मां चांद भी ले आती सपने मैंने देखे मां मं� read more >>
कविता - ( खिलवाड़ ) वहशी ने किया शिकार ! हद कर दी सारी पार !! मानवता हुई शर्मसार ! इंसानियत हुई तार - तार !! शायद रोया होगा महाकाल ! नाम का तो र� read more >>
शायरी नंबर 13 मैं अरज करता अरे हम किसी के बेहकाएँ मैं आकर अपने घर बेहकाएँ. का नास नहीं करते अरे हम किसी के बेहंकाएँ मैं आकर व्यपने घर क read more >>
शाईरी-नम्बर 11 मे अरज करता हूँ। कि घूमंडी साहाब के लिए जो किसी दुख- दई अपने पैसो की अकड नहीं समझते हैं। दर्द किया होता हैं। दर्द पढ़ने वा read more >>
शाहरी जम्बर 6 अजी जो लोग जादा सोचते हैं। किसी की जिन्द‌गी के बारे मैं अजो जो लोग जांदा सोचते हैं। किसी की जिलड़गी के बारे मैं वो लोग ही � read more >>
शारंगरी, नंम्बर 2 जूलम करते हैं! अपने ही रैहेम तो गेर करते है। और अगर जो अपने तो दिखावटी हमदरद होते हैं! और गेर तो हकिकत के हमदरद होते है! read more >>
जिससे खौफ था मुझे वही चीज बार - बार दोहराया गया यह अल्लाह तेरी मर्जी है क्या यही मुझे नहीं बतलाया गया। धन्यवाद read more >>
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