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संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

@ sandeep-kumar-singh
, Bihar

I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.

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समझ सका है कौन यह, होता क्यों तकरार। बात-बात में ही करे,लोग आज के मार।। कोई समझ न यह सके, कलियुग का यह खेल। जलते जन-जन मेल पर,देते read more >>
मर्यादा पुरुषोत्तम राम मानवता के प्रतीक हैं, ब्रह्मांड में अद्वितीय विशुद्ध जीवन शैली हैं। कण _कण में विराजने वाले राम ही हैं, परन्� read more >>
जुल्फों में तेरी हम इस कदर उलझ गए, अपनी भी न खबर कोई इतने हम खो गए। आँखों से तेरी हम पी कर शराबी हो गए, सारे जहां के रंग अब गुल� read more >>
जीवन जीना एक कला है. सबके बस की बात नहीं है की जिन्दगी को पूरा जी ले. पूरा जीवन जीने के लिए जीने का हुनर आना चाहिए. होता यह है की जीवन रू� read more >>
कुछ तो हो बदलाव अब,जब हो भला विचार। दुनिया सुन्दर अति लगे, जन्मे खाली प्यार।। कुछ तो हो बदलाव अब,रखें नजर को साफ। अच्छा ही तब सब दिखे,ग� read more >>
कब बदलोगे सोच तुम,बढ़ते दिव्य प्रकाश। मोहन जैसे मुख लगे,माखन करिए प्राश ।। कब बदलोगे सोच तुम,मिले खुशी जब खूब। सभी चाह भी पूर्ण हो,बन� read more >>
सूर्य उत्तरायण हुए,रुचिकर हुआ उजास। पर्व मकर संक्रांति का,भव्य बहुत ही खास।। सूर्य उत्तरायण हुए,देंगें सबको लाभ। होगा दिव्य विकास � read more >>
(कुंडलिया छंद) मेरे मन की पीर को,समझो मेरे यार। करो प्रेम सब देश से,आपस में हो प्यार।। आपस में हो प्यार,वतन पे हम हैं मरते। बनूं धार तलव read more >>
(दोहा छंद) जाना सबको एक दिन,क्यों लड़ते हो यार। जाएगा सब छोड़ कर,जीवन है उपहार ।। जाना सबको एक दिन,कर लो सबसे प्यार। याद करे संसा� read more >>
मरता क्या नहीं है करता, जिन्दगी है यह इसके रूप अनेक। किसी पर कब हो जाए मेहरबान, किसी पर कब हो जाए नाराज। जीवन भर लेती रहती कठि read more >>

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