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संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

@ sandeep-kumar-singh
, Bihar

I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.

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रण भूमि अनुपमा अद्भुत, पक्ष विपक्ष दोनों भाई भाई । रिश्ते नाते मोह बंधन, जीवन प्रभा अथाह अकुलाई । कर कंपन कदम अविचल, पर सुन कर्म चेतना read more >>
जब करोगे याद तो मुझ को करीब पाओगे। आप जब भी मेरे इस दिल के पास आओगे।। जब खिलेंगे फूल से दिल में तुम्हारे आने से। फिर मिलेंगे नैनों से न� read more >>
आओ मिल जाएं हम सुगंध और सुमन की तरह। एक हों जाएं चलो जान और बदन की तरह। मेरे जीने की तो सूरत है सूरत तेरी - रात_ दिन स� read more >>
दिल पर किसका जोड़ है, दिल के आगे हर कोई हारा। आलीशान कर दे मुझे तूँ ,मेरी जिंदगी में आकर ओ य़ारा। मैँ ने हज़ारों रंग के सपने बुने ह� read more >>
बदली झुकी पर्वत पर,भँवरे चमन में डोले। मोसम है मिलन का,बुलबूल फूलों से बोले। ये वक्त नहीं है इन्तजार का, ओ साथी मेरे_ तूँ कमसिन read more >>
दिल पर किसका जोड़ है, दिल के आगे हर कोई हारा। आलीशान कर दे मुझे तूँ ,मेरी जिंदगी में आकर ओ य़ारा। मैँ ने हज़ारों रंग के सपने बुने ह� read more >>
आजकल रात भर, नींद आती नहीं। एक पल के लिए, याद जाती नहीं। जीना तेरे बिन, दुश्वार हो गया_ दूजा कोई भी, शक्ल भाती नहीं।। (स्वरचित मौलिक) संद read more >>
बदली झुकी पर्वत पर,भँवरे चमन में डोले। मोसम है मिलन का,बुलबूल फूलों से बोले। ये वक्त नहीं है इन्तजार का, ओ साथी मेरे_ तूँ कमसिन read more >>
हार हुई सच्चाई की, झूठ की हो गई जीत। आज तेरे संसार की, सारी उल्टी हो गई रीत। प्रयास करने वाला हार रहा है,निठल्ले ले रहे मौज- कैसा � read more >>
शब्दों में तुझको उतारा, हुआ प्रेम जब मेरा विह्वल। मालाओं में तुझको पिरोया, तेरी एक निर्णय ने, मेरा सब कुछ छीना। पड़ी गांठ जब दिल पर मे read more >>

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