(दोहा छंद)
आदत से मजबूर जो, उस पर चढ़े न रंग।
वो अपना ही चाल चल, करे काम को भंग।।
आदत से मजबूर जो,सोचे कभी न खास।
थोड़े में झूमे सदा,करके द� read more >>
कभी असफलताओं ने, घेरा मुझको,
कभी अपनो ने, आहत किया।
अथाह प्रयास, जो भी किए थे मैने,
उनका कोई, परिणाम नहीं निकला।
टूट गई, अंदर से मैं अब,
बच read more >>
पल पल परिवर्तित होती दुनिया
कभी बचपन तो ,कभी जवानी
कभी देख बुढ़ापा क्यों हो हैरानी।
न कर तू मोह इस जग का......!
कभी विवाह का मंण्डप कभी
कभ� read more >>
जिंदगी सबको बहुत दुख देती है, जिंदगी किसी की हमदर्द नहीं होती है, जिंदगी का गम तेरे से नहीं मुझसे भी सहन नहीं होता है, तू अकेला जिंदगी मे� read more >>