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उड़े बादल- मनमौजी है ए-आवारा, सुखा कहीं बाढ़- फिरता है ए-आवारा,, नाना रूप हैं- जगत में खुशी कहीं गम, नाचे कहीं- किसान हैं देखो कहीं गम,, read more >>
तेरे आंसूओं को बहता देख मुझे बड़ा दुःख होता है । किस चीज की तुम्हे जरूरत है । मुझे जान कर और भी दुःख होता है । मैं चाहता हूं वो वस्तु त� read more >>
हर दिन चमकता सूरज, हमको यही बताता है। काली रात हो चाहे, कितनी घनी, फिर उजाला आता है। हार जाओ अगर, लाखों बार, प्रयास करो, फिर भी लगातार। ज� read more >>
मेरा गाँव वो छोटा सा मेरा गाँव जिसमें चलते हमारे पाव वो सुन्दर हमारे खेत खलिहान जो बताते हैं हमारी पहचान पेट की भुख वाली आग read more >>
सांडली पेणातली शाई मला भरता येत नाही, सरपंचा विषय काही बोलता येत नाही. गावात कामे नाही होत आता तस्तीची , गा*त शब्द मोडतो यांचा मस्तीची. read more >>
पिता एक पर्वत के समान होता है बाहर से कठोर अंदर से मुलायम होता है झुक जाता है तुम्हारी ख्वाहिशों के लिए क्योंकि उसको तुम्हारी ब� read more >>
#विधा:_कुंडलिया छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मनमानी किसकी चली,नहीं किसी का यार। ऐसों को हो हाल यह,सदा मिली है हार।। सदा मिली है हार,� read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मनमानी किसकी चली,बड़े बड़े हो ढ़ेर। हर कुछ का है दायरा,माने जो वह शेर। त्याग रखें अभिमान read more >>
#विधा:_रोला छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रावण थे अति वीर,चली कभी न मनमानी। उसको था वरदान,दिए शिव थे जो दानी।। हुआ उसे अभिमान,हरण कर आ� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मनमानी किसकी चली,नहीं किसी का यार। मनमानी वाले गए,खोकर सब अधिकार।। मनमानी किसकी चली,बड़े � read more >>
सांस की जरूरत है जिन्दगी के लिए, आंख की जरूरत है देखने के लिए। दोस्त की जरूरत है जीने के लिए, हवा की जरूरत है सांसों के लिए। चांद की जरू read more >>
जिसने मानी बुद्धिमान की सलाह, उसका होता है सदा भला, इस सलाह से कोई नहीं हो सकता खफा, बुद्धिमान को भी माननी पड़ जाती है, कभी-कभार मूर्ख की � read more >>
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