कितने अच्छे थे वे दिन
जीते थे चिंता के बिन..
खूब पढ़ना, खूब लिखना
मौज मस्ती, गिन -गिन -गिन
चलते फिरते थे बिंदास
रखते दिल में बड़ी सी आस
अ� read more >>
बचपन का साथी
बचपन का साथी कब राहों में खो गया,
यह पता चला ही नही।
मैं बच्चा से कब बड़ा हो गया ये पता चला ही नहीं।
बचपन के वो लम्हे जो हर स� read more >>
डगमगा गई थी कुछ देर के लिए
पर अब संभल गई हूं मैं
जिसके पीछे भाग रही थी
वो एक परछाई है, अब समझ गई हूं मैं
उस रोशनी के पीछे भागी
जिस रोशनी क� read more >>
सीधा-साधा मनुष्य क्यों झेलता है दुख, वह नहीं जानता जब किसी को देना दुख, सीधे-साधे को सब कहते हैं मूर्ख, क्योंकि अपना नुकसान होने पर भी रह� read more >>
सीख- 33
ये दिल यूं ही मचलता जायेगा, शान्त रहना सीख,
मानव सेवा हुकम नम्रता की, ठंडा रहना सीख,
जमाना चलता आया, चलता रहेगा, साथ चलना सीख,
प्र� read more >>