"दर्द अपनों से"
सताए चाहे दुनिया जितनी
फिर भी हम हंस लेते हैं
आस्तीन में पलने वाले
सांप ही अक्सर डस लेते हैं ll
धन-संपत्ति सब कुछ � read more >>
एक ,चेहरा नहीं ,लिख ,पाती हूँ,।
मगर ,साए से यह ख्वाहिशें ,मन ही मन ,
फिर वहीं ,याद गुनगुनाती हूँ,
निश्छल ही यह प्रेम ,अधुरा कहाँ,रहा,।
मगर भट� read more >>