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नर्मद, तुमने जगाया था, गुजरात का स्वाभिमान। "जय जय गरवी गुजरात" से, भर दिया जन-जन का प्राण। सुधारक, चिंतक, लेखक तुम, ज्ञान की ज्योति जला� read more >>
कौरव-पांडव रणभूमि में आए, धरती ने भी स्वर थरथराए। ध्वनि उठी शंख और नगाड़ों की, पर मन में आँधी थी अरमानों की। कर्ण ने देखा सामने अर्जुन read more >>
गोकुल की गलियों में बांसुरी बजाई, माखन चुराकर भी प्रेम सिखाई। गोपी-ग्वाल संग हँसी की धारा, फिर भी भीतर था विश्व का सहारा। रणभूमि में � read more >>
जन्मा था सूर्य की छाया से, पर छोड़ा गया समाज की माया से। माँ ने आँचल का दूध न पिलाया, पर राधा ने प्यार का समंदर बहाया। हर कोई कहे — "सूतप� read more >>
जब जीवन भाग-दौड़ से थक जाता है, मन भ्रम और चिंता में उलझ जाता है, तब कृष्ण की वाणी फिर याद दिलाती है— "कर्तव्य करो, बस कर्म निभाते जाओ।" न read more >>
हमारे भीतर ही है, यह अद्भुत संसार। पाँच ज्ञान, पाँच कर्म, अंतःकरण के चार। नेत्र देखें संसार, रूप-रंग और आकार। कान सुनते ध्वनि, मीठे बोल read more >>
तू डिप्रेस है तो क्या... " तू डिप्रेस है तो क्या... एक बार अपनी सोच से बाहर निकल कर तो देख... सब तेरे साथ खड़े हैं, पर तू सबके साथ खड़े होकर तो द read more >>
बेटी वो फूल है, जो खुशबू से आँगन महकाती है, पंखुड़ियों सी कोमल, पर हौसलों में पर्वत दिखाती है। उसकी हँसी से घर गूँज उठता है, उसकी मासूम read more >>
देखो कितनी अच्छी सनसनी हवा है जो चढ़ा ये फगुनाहट की महीना है खिली है खेत खलियान सारे की पतझड़ बाद हरियाली पेड़ो पे छाई है चिहक रही ह� read more >>
ACB
अंधेरों में जब लोभ पनपता है, जब रिश्वत का खेल जम जाता है, तब न्याय की आवाज़ बनकर, ACB का दीपक जल जाता है। जब झूठ और धोखे की दीवारें, ये साह� read more >>
[पुस्तक टाइटल] तेरी हँसी का राज ए समझ ना पाया, नादान था दिल बेचारा समझ ना पाया। कितने रिश्ता ठूकड़ा दिया सिर्फ़ तुम्हे पाने की हसरत मे read more >>
वीरों का वंशज है आर्यावर्त की भूमि, युद्ध का आगाज़ है तो लड़ना स्वीकार है। अमन न हो गर तुम्हें तो हम क्या भीरू हैं, उठा असि चला देखें कौ� read more >>
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