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होली यारों मैं क्यों खेलूं सब पर फरेब मुखोंटे हे | किसी के दिल में केसे बसु में सब के दिल बहुत छोटे हैं || इस रंग बदलती दुनियां में एक र� read more >>
*"वक़्त की स्याही में लिपटी ज़िंदगी"* किसी ने आज हंसकर पूछा, "कौन है वो.?" हम भी मुस्कुराए, मगर जवाब यूँ दिया— "किसी के कानों की बाली में जड़� read more >>
घाट का एक ख़ामोश पत्थर हूँ मैं, मैंने नदी के हज़ार नखरे देखे हैं… कभी लहरों की हल्की छुवन, तो कभी बाढ़ के ग़ुस्से देखे हैं… कभी किसी न� read more >>
नील गगन के नीचे, जलधारा के बीच, एक नाव चली, बहती रीतम - रीत। नाव की देहरी पर बैठी कोई, मानो स्वप्नों से आई जलपरी। नयनों में गहराई, लहरों-� read more >>
शक्ति के प्रेम में शिव भी बदल गए थे, वैरागी से किसी के हमसफ़र बन गए थे। जो ध्यान में लीन, विरक्त थे सदा, प्रेम के स्पर्श से शक्ति के हो गए read more >>
रे मनुष्य हो सावधान! वन्य जीवों का करो सम्मान !! मानवता हेतु शर्म की घड़ी है प्रश्नों संग पशु दुनिया खड़ी है काट डाले आश्रय वन सारे न� read more >>
टहनियों के बीच से झांकता परिंदा, बाहर के माहौल को भांपता परिंदा, घोसले के मोह से न जागता परिंदा, पर भूख के पीछे भीतर भागता परिंदा। ज्य read more >>
बताओ कौनसी किताब लिखूं सितारों की महफिल में सबसे अलग लगाती हो तुम आंखों में लगी काजल और खुले बाल में लाजवाब लगती हो तुम बताओ तुम पर क� read more >>
घट्ट मिठीत बांधते हे चांदणे, चंद्रा घरी नांदते विना स्वप्नांचे, डोळे जणू दिसे वांझटे. चंद्राच्या स्पर्शात उजळते संध्या, तुझ्या आठव read more >>
उठो चलो अब दाव दो, ये शंकनाद हो चला, ये सूर्य भी है बोलता, ऐसे जीतोगें कैसे भला ??? खिली धूप इस दोपहरी की, अब सूरज सिर पर आ गया, उठो चलो दौड� read more >>
गुरु ग्रंथ है उस ज्ञान का, किताब जिसको ना चाहिए। गुरु संत है उस शाम का, शिव भी जिनको शीश झुकाए। गुरु इतिहास है उस देश का, जिसे आज हम ग� read more >>
सरसर तरणी तैरती, गहरी झील के सीने पर। गद्गद मद के गद के गद से, खुद के किश्ती होने पर। मुझे सरूर, इसका टूटा ग़रूर, विवश जीवन जीने पर। ए� read more >>
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