सबके मन को भाती जाय,
अदरक वाली मीठी चाय, सुबह सुबह जब मिलती ना, अदरक वाली मीठी चाय, मन नहीं लगता उस दिन जिस दिन मिलती ना हमको चाय, सबके मन क� read more >>
न ज़रूरत न हसरत, दूसरों को बदलने की।
ज़रूरत व हसरत है, खुद के सुधरने की।
वे तो न सुधर सके, उनका कोई ख़ता नहीं।
सुधारने के फेर में, खुद कित� read more >>
अचंभा क्या है? ताजमहल का
बस तरासे चूना पत्थर ?
शायद नहीं !
किया अजूबा इसे विश्व में ,
भाव छिपा क्या इसके अंदर ?
देखा जब दूर से उस मीनार को read more >>
रोके रुके न नीर नयन से ,राम चले जब छोड़ भवन से
जड़ चेतन हो शून्य चले थे,कुछ कहे कौन हो मूक बने थे
दु:ख को सहे जब दे विधाता,यहां तो मैं ही थी read more >>