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दिल के झरोखे में एक ख्वाब सजा रखा था, खिल उठे चेहरे पे एक नूर सजा रखा था, समानों के झुरमुट में रंक को राजा बना रखा था, मनचाही मुरादों में � read more >>
* सुप्रभात * समय से पल कुछ , इस तरह से पिघला...! रात गुजर सी गई , धीरे से दिन निकला...! पर इस चीज को यहां , कोई नहीं पाए बतला...! सवाल बहुत ही , read more >>
वो भी क्या ही दिन था, जब हम मिले थे... 😍मेरा जन्मदिन था उस दिन, जब हम मिले थे.🤗 दिन का समय दिया था आपने तब जब हम मिले थे... 😃 हो गई थी शाम टूटने read more >>
ओ गलवान के वीर शहीद। तू है कितना खुशनसीब। चारो तरफ तेरे ही। शोक के खबरे छायी। रो रही धरती अम्बर। रो रही पर्वत खाई। मेरे बेटो ने रक्� read more >>
अफगानी बाला मृग सी चंचल लाचार निगाहों में इक्कीसवीं सदी की बेबस माँ की बाँहों में अफगानी हर बाला की अस्मत को लुट ते देख। विश्व � read more >>
उल्टी दिशा, उल्टी बयार। हे दुनिया, तेरे रंग हज़ार। आतंकवादी, शांति का पाठ पढ़ाते हैं। रिश्वतख़ोरी खून में, ईमानदारी सिखाते हैं। गद्द read more >>
दोष क्या लगाऊँ आपको, गलती तो मेरी थी... सपने मैंने सजाये और वो टूटे ,ये तो रब की मर्जी थी... आँख से आसु गिरते रहे और रात निकल गई फिर भी, याद त� read more >>
* इल्तिजा * मैं जानता हूं कि तुम मुझे, एक दिन हमेशा-हमेशा के लिए, अकेला छोड़ कर चली जाओगी इंतजार कर रहा है तुम्हारा, एक बिखरा सा गुलश� read more >>
ना मानवता का रहा मान। जहाँ इंसानियत हो शर्मशार। आये दीन होते हैं बलात्कार। कब रूकेगा ये जधंय अपराध। कब तक होगा मनिषा निर्भया कांड। read more >>
नहीं सुरक्षित आज के नारी। कदम कदम पर अत्याचारी। कभी ब्लैकमेल कभी फरेब के मार। कभी हो जाये यौन उत्पीड़न का शिकार । आज के नारी इस जग मे read more >>
आयी घर में नंही सी गुड़िया। लगती प्यारी प्यारी सी परियाँ। इसके ओठ है फूलो के पंखुरिया। जो है सबकी सखी सहेलिया। कभी रोती है कभी हँसत� read more >>
आरजू की हद हो गई, विचारों ने संग्रह में धावा बोला। चाहतों के फूल ने खुशबू बिखेरी, हद यह खेल मजाक हो गया। रंग_बेरंग सी मन हो गया, उलझनों न read more >>
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