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एक सफ़र (यात्रा वृतांत) .

Meena ahirwar 10 Jun 2024 कहानियाँ अन्य कहानी- एक सफ़र (यात्रा वृतांत) # वस्विकता पर आधारित# 77619 0 Hindi :: हिंदी

कहानी - एक सफ़र (यात्रा वृतांत) 
एक रोज़ मैं अपनी सहेलियों के साथ किसी काम से बाहर गई थी, उस सफ़र में मुझे एक बुजुर्ग औरत मिली, वह काफी परेशान थी, उसे अपने घर जाना था.लेकिन उसके पास जाने के लिये कोई पैसे नहीं थे, उस समय उसने मुझसे कुछ पैसें मांगे, कहाँ बेटी मुझे कुछ पैसों की जरूरत हैं.मुझे अपने बेटे के पास जाना हैं और मेरे पास बस का किराया भी नहीं हैं, बेटी मेरी थोड़ी मदद कर दो ताकि में अपने बेटे के पास जा सकूँ, मैंने कई लोगों से सहायता मांगी लेकिन किसी ने मेरी मदद नहीं की, उस समय मेरे पास भी ज्यादा पैसें नहीं थे, और मुझे भी घर जाना था, लेकिन मेरा सफ़र ज्यादा लम्बा नहीं था, में वहाँ से चलकर भी आ सकती थी, लेकिन वह बुजुर्ग औरत अपने बेटे के पास चलकर नहीं जा सकती थी, क्युकी उसका सफ़र काफी लम्बा था, और वह बुजुर्ग थी ये सभी बातें मैं मन में सोच रही थी, इसीलिए मैंने अपने हिस्से के पैसे उसे दे दिये.वही से मेरी सहेलियाँ भी अपने- अपने घर लोट गई, लेकिन किसी को ये पता नहीं था, की मेरे पास केवल उतने ही पैसें थे, जो उस बुजुर्ग औरत को दे दिये थे, और मैंने अपनी सहेलियों से कुछ नहीं कहाँ की मेरे पास घर जाने के लिये पैसे नहीं हैं, मैंने सब पैसे उस बुजुर्ग औरत को दे दिये थे, और उन सबको जाने को कह दिया, उस दिन मुझे चलकर ही घर आना पड़ा था, लेकिन घर में किसी को नहीं बताया की में चलकर आई थी, लेकिन मुझे इस बात की खुशी थी की वो अपने बेटे के पास पहुँच जायेगी.
 
उद्देश- इस कविता का मुख उद्देश हैं कि, हमें जरूरत मंद इंसान की मदद करनी चाहिए. बिना किसी स्वार्थ के, यदि आप किसी की थोड़ी मदद कर सकते हैं तो करे. बदले में कुछ मिले या न मिले.

नाम- मीना अहिरवार, 
जिला- छतरपुर (म. प्र) .

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