जीवन का .... शुरू ,सफर
अब है ......
पहला कदम, पहली ड़गर ....
अब है
सिख रहे है। चलाना ,योही ...
गिरते संभलते ।
नजरों के आगे ,जब अपनी माँ रहती है।
चले। read more >>
सामाजिक छल - F-58
हूँ धन से गरीब, नहीं अन्न से गरीब, ना दिल से गरीब,
गरीबी मेरी का यूं मजाक ना कर II
हूँ हक हलाल का मालिक, दिल से जिया, खरी read more >>
हम अभ्यस्त हुए -59
शक्ति महिला, अरमान, फरमान, कर्ज दान ईमान
सब त्रस्त हुए,
रीत पुरानी, कुरीत जनानी, करें मन मानी,
हम अस्त - व्यस्त हुए,
चलत� read more >>
मेरे लिखने से क्या
तुम पढ़ो तो कोई बात बने..
मेरे सोचने से क्या
तुम समझो तो कोई बात बने...
मेरे चाहने से क्या
तुम एहसास करो तो कोई बात बने. read more >>