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अब देखो न- हाथ की लकीरें मिट गई, याकि देखते- देखते दृष्टि कम गई,, तकाजा-ए-उम्र है- जनाब, मौसम बदल गई, उम्र घटती- गई मोहब्बत बढ़ती गई....!!!! -� read more >>
पता है हमें इतनी आसान नहीं है हमारी राहें पर क्या करूं चलना ही है ख्वाब ही ऊंची देखी है ये निगाहें तो मुश्किलों से भी मुस्कुरा के च� read more >>
आवाजें ही तो मेरी पहचान है बसा इसमें मेरा स्वाभिमान है फिर क्यों ख़ामोश हो जाऊं आवाजें ही तो मेरी मुकाम है क्यों सुन कर भी अनसुनी कर read more >>
तु कहती है ना सब कुछ ले लिया मैंने तेरे हिस्से का पर तेरी किस्मत लेने के बाद ये महसूस किया बिना तेरे किस्मत जीना इतना मुश्किल भी नहीं read more >>
झाली रात माझ्या शब्दांची सात मग रॅप नेतो मला चांदण्यांच्या पार येय... आज रॅप vice full broken heart देतो तुला feel जरा ये माझा पास माझ्या भाषेच्या सौंद� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" रोने से क्या फायदा,आगे का यूं सोच। रहो दूर तकलीफ से, जीवन में हो लोच।। रोने से क्या फायदा,ग� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" लीपा_पोती चल रही,माता के जो भक्त। चमक रहे घर द्वार अब,बना रहूं हम सख्त।। लीपा_पोती चल रही,द� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक जरा सी भूल से,भारी हो नुकसान। और व्यर्थ चिन्ता रहे,जाते घट है मान।। एक जरा सी भूल ने,ले ल� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काला है कुछ दाल में,बाहर से है रंग। लौटे जो बेरंग हो,देख सभी हो दंग।। काला है कुछ दाल में,आँ� read more >>
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मन पापी माने नहीं,भागे सबसे तेज। हर दिन कुछ है सीखता,पढ़ता हरेक पेज।। मन पापी माने नहीं,कर� read more >>
प्रेम से जिसने जग को मोह लिया, आपने पिता के वचनों के खातिर, राज -पाठ से भी मुंह मोड़ लिया, 14 वर्ष वनवास किया, हर कठिनाई से लड़ने का प्रयास � read more >>
#विधा:_मुक्तक छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" एक जरा सी भूल से,भारी हो नुकसान। और व्यर्थ चिन्ता रहे,जाते घट है मान। मंद पड़े तब हौसला,आ� read more >>
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