सच्ची है, नहीं तकिया- कलाम।
गुलामी, तुझे सलाम।
कोई धर्म का, कोई कर्म का, कोई शर्म का गुलाम है।
कोई आदत का, कोई मत का, कोई हरम का गुलाम है।
क read more >>
मैं नहीं काठ की कोई पुतली
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मैं नहीं काठ की कोई पुतली,
ना सौप किसी गैर के हाथ मुझे ।
मोहे सात फेरो में बांधने से पहले बाब read more >>