मर्यादा सम्मान मान,
ये सब कुछ कुचल रही है
ये इक्कीसवीं सदी चल रही है
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एक पिता बच्चों की खातिर
सारे दुखड़े झेले read more >>
ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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ऐ जीवन के थके मुसाफिर,
बढ़ चल मंजिल अब दूर नहीं ।
कर्म करे फल ना पाये,
ये प्रकृति का दस्तूर नहीं ॥
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गढ़ की मान बचावन की खातिर,
सिर कटा लेगा देश को वीर,
अंगारों पर भी हसते हसते चल लेगा,
मारे गढ़ री तो एक ही शान |
मुछ नहीं रखी मर्द कैसा,
यह � read more >>
दोस्त ?
उसका नाम दिनेश था । स्नातक के तीसरे साल में उससे पहली बार कक्षा के बाहर मुलाकात हुई थी , 5.5 फुट का भरे बदन का लड़का चेहरे पर घनी मू� read more >>
आपको अपनी जिंदगी में बेचैनी कब होती है ?
जब हर रोज एक जैसी ही जिंदगी को जिए जा रहे हो,ऐसा लगता है यार कितना दुख hai हमारे जीवन में ,थक चुके ह read more >>