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रोटियां खिलाने वाले खुद भूखे सो रहे अन्न उगाने वाले को हैं दीमक खा रहे जो किसान हैं वो अब किसान लगते नहीं वड़े वड़े व्यापारी किसान ब read more >>
''इस अनमोल जीवन का उद्देश्य धनवान बनना नही,कर्मवान बनना है।'' read more >>
करती हैं किलकोरें कलियां, महक रही हैं गलियां -गलियां , मचा रहे हैं शोर पेड़ पर, खगकुल हंसते- हंसते । प्रभात काल का नमन नमस्ते।। पूरब का � read more >>
कभी भीड़ में कभी तन्हाइयों में कटेगी यह जिंदगी है यारों हर दिन एक पल घटती ही रहेगी कुछ पाने की चाहत है कुछ खोने का डर है दिल में बस हर व� read more >>
आपका जिक्र आपकी यादें ही काफी है जिंदगी जीने के लिए यही उम्मीद ही काफी है जब भी कहीं मुलाकात हो मिलकर मुस्कुरा दीजिए जिंदगी जीने के read more >>
आज जी भर के बातें कर ले हम न जाने कल हम इस सफर में रहे ना रहे कई मोड़ है इस सफर में न जाने कौन सी राह मुड़ती है मेरे शहर को टूटते हैं रो� read more >>
न जाने मन में कितनी इच्छाओं को लिए यह जिंदगी का सफर चलते चला जा रहा है यदि राह में पतझड़ भी मिल जाएगा तो उसको मैं दिल से बसंत बना लूंगी read more >>
भूल गए हैं अतीत को हम जैसे भूल जाते हैं जैसे हर दिन रात को हम दर्द देता है अतीत के पन्नों को फिर से पढ़ने मे न जाने फिर क्यों डर लगने लगत� read more >>
एक मूरख नारी को कब,ना जाने किसने। लपेटा था। ज्ञात हुआ तब लोगों को, जब जना नारी ने बेटा था। कहने को वह मूरख थी, पर पुत्र प्रेम की क्षमता थी read more >>
"जगावे न जगने जगून जगा वेगळे, इथे न कोणी आपला आपले आपून एकटे." read more >>
मैं अभी पुल पार कर ही रही थी कि सचखंड ट्रेन स्टेशन पर आ गयी ,मैं और तेज तेज भागने लगी ,मेरी साँस बुरी तरह फूलने लगी | मेरे भाई ने टोका “जल� read more >>
पीढ़ियों से जहां एक पेड़ पीपल का था वो कहाँ गया? पतझड़ में, जिसकी छाँव बड़ी शीतल, थी और जिसके नीचे बिना धर्म की बैठक थी! ओ हो ! हमने उस� read more >>
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