[email protected]
Join Us:
Home
Category
कहानियाँ
कविताएँ
ग़ज़ल
गीत
शायरी
आलेख
महत्वपूर्ण सूचनाएँ
Topic
धार्मिक
राजनितिक
प्यार-महोब्बत
हास्य-व्यंग
बाल-साहित्य
समाजिक
देश-प्रेम
दुःखद
साहित्य लाइव सूचनाएँ
अन्य
Videos
Others
Search Articles
Latest Updates
Popular Articles
Testimonials
Video Tutorials
Winner List
How to publish articles
My Account
Login
Register New Account
Forgot Password
Login
दिशा-लाइव ग्रुप ने लॉन्च किया नया ब्रांड BizPry - लोकल से ग्लोबल तक
20 मई स्पेशल -इंटरनेट पर कविता कहानी और लेख लिखकर पैसे कमाएं - आपके लिए सबसे बढ़िया मौका
साहित्य लाइव की वेबसाइट हुई और अधिक बेहतरीन और एडवांस
साहित्य लाइव पर किसी भी तकनीकी सहयोग या अन्य समस्याओं के लिए सम्पर्क करें
समाजिक
Home
Sub-Categories
समाजिक
तेरी क्या औकात है सरा हुआ है अक्ल-अब तक भी पीछे रहे करते खाली नक्ल
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,सरा हुआ है अक्ल। अब तक भी पीछे रहे,करते खाली नक्ल।। तेरी क्या औकात है,आए �
read more >>
जीना है तो सीख ले जीने के सब ढंग-अनुभव की जब दीप हो रहे प्रगति तब संग
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,जीने के सब ढंग। अनुभव की जब दीप हो,रहे प्रगति तब संग।। जीना है तो सीख ले,जी
read more >>
नारी तेरा संग हो फिर तो है आनंद-सुख दुख को हम बांट कर पिएं नित्य मकरंद
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नारी तेरा संग हो,फिर तो है आनंद। सुख दुख को हम बांट कर, पिएं नित्य मकरंद।। नारी तेरा संग हो,�
read more >>
गरीबी ने मारा-गरीबी ने सारे अरमानों को जला कर राख कर दिया जिंदगी की सारी कलियाँ ही मुरझा गई
गरीबी ने सारे अरमानों को जला कर राख कर दिया, अपनों के भीड़ से सरेआम बाहर कर दिया। अपने ही समाज ने जिल्लत भरी जिंदगी है दी, जिंदगी की सा�
read more >>
अंतिम दिन बनवास का होगा रावण अंत-खुशियाँ भारत वर्ष में करते जय जय संत
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" अंतिम दिन वनवास का,होगा रावण अंत। खुशियाँ भारत वर्ष में,करते जय_जय संत।। अंतिम दिन वनवास �
read more >>
मन में धीरज राखिए तभी मिलेंगे नूर-श्याना बनकर हम यहां लेते रहें सरूर
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" मन में धीरज राखिए,तभी मिलेंगे नूर। श्याना बनकर हम यहां,लेते रहें सरूर।। मन में धीरज राखिए,
read more >>
होगा भला समज का जब खुद में हो शक्ति-कुछ ऐसा ही काम कर मिले न कहीं विरक्ति
#विधा:- दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" होगा भला समाज का,जब खुद में हो शक्ति। कुछ ऐसा ही काम कर,मिले न कहीं विरक्ति।। होगा भला समा�
read more >>
आकस्मिकता-थोड़ी ही देर में बना बनाया काम बिगड़ जाता है
थोड़ी ही देर में, बना -बनाया काम, बिगड़ जाता है। सबसे आगे वाला, पिछड़ जाता है। थोड़ी ही देर में, जीतने वाला, जाता है हार। हारने वाले की, �
read more >>
कुछ समय पहले तक ऐसी उदासी न थी-चारों ओर ऐसा सन्नाटा ना था
कुछ समय पहले तक ऐसी उदासी न थी चारों ओर ऐसा सन्नाटा ना था मुर्गे की आवाज से पक्षियों की चहचहाट से होती थी सुबह शुरुआत न जाने कहां से द�
read more >>
परिवार-परिवार में रहना ही सबसे अच्छी बात है
बात उन दिनों की है जब हमारी शादी एक संयुक्त परिवार में तय हुई। मुझे पहले से ही पता था कि मेरे पति अपने माता-पिता अपनी दो बहन दो भाइयों के
read more >>
मेरी पहली कमाई-घर के देख हालातों को खुद से ही मैं रूठ गया हूँ
घर के देख हालातों को खुद से ही मैं रूठ गया हूँ ज़िम्मेदारीयों का बोझ लिए आज कमाने निकल गया हूँ। पसीने से कपड़े हैं लतपत हाथों पर मेह
read more >>
रुप बदले अंदाज बदले दया धर्म करने वाले के भी लिहाज बदले
रुप बदले अंदाज बदले दया धर्म करने वालों के लिहाज बदले बदल गया यह पूरा जमाना मुसीबत आई जब एक अबला पे सबके राज बदले मानवता शर्मसार हुआ
read more >>
« Previous
Next »
Showing
1129
to
1140
of
5535
results
‹
1
2
...
92
93
94
95
96
97
98
...
461
462
›
Join Us:
© 2026 |
Sahity Live
®
| All Right Reserved.
A product of
DishaLive™ Group
| Digital Partner:
MyDL.in Website Builder