नीली छतरी वाले को लूटने का मन में ना रखो विचार, यह ना समझो बस लेने का है, उससे तुम्हें अधिकार, उसको है अपने बच्चों से प्यार लेकिन कपूत बच् read more >>
#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार।
और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।।
मन से मन को मेल क� read more >>
क्षण भंगूर सा है ये मानुस,
दर्पण की तरह बिखर जाये,
मन मे ले जब दृढ- संकल्प,
हीरे की जैसे निखर जाये,
फिर भी ना जाने मुझे यहाँ,
भांति भांति � read more >>