#विधा:_दोहा छंद
#"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत"
मुझ पर यह अहसान कर, मुझ से कर ले प्यार।
और करो अधिकार भी, बनकर यूँ दिलदार।।
मन से मन को मेल क� read more >>
(Sortha Chhand)
खिलते जब हैं फूल,दिव्य खुशबू तभी उड़े।
उड़ते जब हैं धूल,एक अड़चन नव्य दिखे।।
होती है बरसात,कलियाँ सारी तब खिले।
आती जब है रात,� read more >>