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आंगन की रौनक खुशियों का खुमार लिखूंगी-कलियों सी खिलने वाली बेटियों का संसार लिखूंगी
आंगन की रौनक खुशियों का खुमार लिखूंगी कलियों सी खिलने वाली बेटियों का संसार लिखूंगी कहने को तो मां की लाडली और पापा की परी होती है �
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मन की हवा-हवाई में देख कहां खो गए हम
"कल्पना की हवा-हवाई... में कहां खो गए हम, "कल्पना ए-मन की... हवा-हवाई में खो गए हम,, "ये तन हीरा मिला कहां... ये मन के डगर खो गए हम, "ये मेरा हुआ �
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मक़सद न हो कोई सफर-ए जिंदगी परख बिना वीरानों में
"मक़सद न हो- कोई सफ़र यूंहीं, कट जाए वीरानों में!" "मक़सद- बिना यह ज़िंदगी, यूंहीं कट जाए वीरानों में!" "यह रत्तन- अनमोल मानव तन, कहीं ख�
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मां-सामने गुस्से से डांटती डपटती है
सामने गुस्से से, डांटती, डपटती है। सोए हुए का धीरे से आ, माथा चूमती है। सामने निठल्ला, निकम्मा, कामचोर कहती है। बाहर मेरी बड़ाई करते, क
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अलविदा अलविदा अलविदा अलविदा-मेरे जाने का ग़म ना करना दोस्तों हंसते हंसते दे दो विदाई मुझे
मेरे जाने का ग़म ना करना दोस्तों हंसते हंसते दे दो विदाई मुझे याद हमेशा तुम आओगे भुले से भुलाओगे कहती मेरी परछाई मुझे अलविदा अलविदा �
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काटे कटी न रात अब-रहूं बड़ा बेचैन जब से देखा हूं उसे वही बसी है नैन
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" काटे कटी न रात अब,रहूं बड़ा बेचैन। जब से देखा हूं उसे,वही बसी है नैन।। काटे कटी न रात अब,रहत
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तेरी क्या औकात है-सरा हुआ है अक्ल अब तक भी पीछे रहे करते खाली नक्ल
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" तेरी क्या औकात है,सरा हुआ है अक्ल। अब तक भी पीछे रहे,करते खाली नक्ल।। तेरी क्या औकात है,आए �
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जीना है तो सीख ले-जीने के सब ढंग अनुभव की जब दीप हो रहे प्रगति तब संग
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" जीना है तो सीख ले,जीने के सब ढंग। अनुभव की जब दीप हो,रहे प्रगति तब संग।। जीना है तो सीख ले,जी
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नारी तेरा संग-सुख दुख को हम बांट कर पिएं नित्य मकरंद
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" नारी तेरा संग हो,फिर तो है आनंद। सुख दुख को हम बांट कर, पिएं नित्य मकरंद।। नारी तेरा संग हो,�
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समझो जीवन अर्थ को- हमें मिला वरदान जगत सजा संगीत से
#विधा:_दोहा छंद #"सृजन समीक्षार्थ प्रस्तुत" समझो जीवन अर्थ को,हमें मिला वरदान। जगत सजा संगीत से,बनिए सदा सुजान।। समझो जीवन अर्थ को,रहे
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औजार भी है आवश्यक जीवन के लिए- और प्यार भी है आवश्यक जीवन के लिए
औजार भी है आवश्यक जीवन के लिए, और प्यार भी है आवश्यक जीवन के लिए। दुनिया में लाखों दोस्त भी हैं बनते, और लाखों दुश्मन भी हैं बनते। कभी_�
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गरीबी से नहीं होगा किसी का अंत-यह पूण्य करके जीवन में सदा रहोगे मस्त
कंगाली करवाती है अपमान, पेट भरने को बिना धन के नहीं मिलता है खाने पीने का कोई सामान, कर्जा लेकर गरीब खो देता है अपना सुख चैन आराम, बेईमान
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