(दोहा छंद)
आदत से मजबूर जो, उस पर चढ़े न रंग।
वो अपना ही चाल चल, करे काम को भंग।।
आदत से मजबूर जो,सोचे कभी न खास।
थोड़े में झूमे सदा,करके द� read more >>
बहुत पहले की यह बात है। एक भिखारी था। दिन भर वह चल_चल कर भीख मांगा करता था। एक दिन कुछ अजीब सी घटना घटी। दोपहर के समय में वह किसी धूल भरी स� read more >>