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मुक्तक साधु बना शैतान है,संकट में है आन। किसको कहोगे अब सही,हैरत में है जान। कागा मोती चुग रहे,दाना खाए हंस-- समय समय का फेर है,साँप � read more >>
खोई यह सरकार है ,खोई मन की लाज। हैरत में अब सांस है,बदतर है अब आज। मर्यादा लज्जित हुई,सीमा है लाचार-- अगर रहे यह हाल तो,बिक जायेगा ताज l read more >>
मुक्तक अगर जलो कंदील सा,छू लो तुम आकाश l ज़िगर रखो फौलाद का, देते चलो प्रकाश l डरते तो कायर यहाँ, रखो लगन जब साथ_ करो फतह तब हर किला,नही� read more >>
ग़ज़ल 212,212,212,22 सत्य जलता नहीं है जलाने से। पाप धुलता नहीं है नहाने से। प्यार है तो खुशी है जहाँ में बस। जिन्दगी कुछ नहीं है सतान read more >>
सावन का महीना अति अच्छा लगता है। सोये अरमान भी अभी जाग उठता है । बावले सावन के बादल सबको भाये । बरसे तो दर्द भूला सबको मुस्का� read more >>
शिक्षा नहीं व्यापार बन गया है शिक्षक बिक रहे हैं, चंद पैसों में सौदा कर रहे हैं। नई विपत्ति आ रही है, नई पीढ़ी मार खा रही है। परंतु सर� read more >>
सुबह के पाँच बज रहे थे। गाँव की गलियों में अभी अँधेरा था, लेकिन रामदीन की आँखों में नींद नहीं थी। वह अपनी पुरानी चारपाई से उठा, आँगन मे� read more >>
तूने जो दिया उसमे मेरी रजा, क्या लिखू ऐसा जिसमे तेरी सजा ।। read more >>
जब कोई इंसान बार-बार झूठ बोलता है, तो भरोसा टूट जाता है। इसलिए झूठ इतना भी मत बोलो, कि जब कभी सच कहो, तो लोग उस पर भी यकीन न कर पाएं...!! Thanks read more >>
मानवता के पथ सृजन में मानवता के पथ सृजन में अहंकार का त्याग करो प्रेम और सद्भाव वृत्ति से जीवन का श्रृंगार करो, स्वार्थ लोभ दुर्गु� read more >>
किसान कागज के इन पन्नो पर, मै अपना थकान लिखूँगा मिट्टी के हर एक कण पर,मै अपना अरमान लिखूँगा लहरातें हो खेती चाहे,हो ऊँचे पर्वत नदियाँ read more >>
मिट्टी की खुशबू गाँव के किनारे एक छोटा-सा घर था। घर के सामने मिट्टी का आँगन और आँगन के बीचों-बीच एक पुराना नीम का पेड़ था। उसी पेड़ की छ� read more >>
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