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संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

@ sandeep-kumar-singh
, Bihar

I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.

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सैनिक को नमन सैनिक वो जो अपने जान पर खेल कर वतन और वतन के लोगों को सुरक्षा प्रदान करते हैं। अपने खुशियों को त्याग कर आवाम को खुशियाँ प्� read more >>
*ग़ज़ल* ख़ुशामद बराबर किये जा रहे हैं ख़फ़ा मुझसे होकर वो पछता रहे हैं निगाहें उठाकर जो देखा तो जानम ख़िरामाँ ख़िरामाँ चले आ रहे है� read more >>
ग़ज़ल बुजदिल जो इंसान है वो, जिंदा भी बेज़ान है वो। भूखे को जो न दे रोटी, दरिद्र ही यजमान है वो। जो भी तुझ पर गुजरी है, मौला का फरमान है वो read more >>
जिन्दगी जीने की कला जिन्दगी जीने की कला आनी चाहिए पहले। फिर तो जिन्दगी का संपूर्ण मजा को कोई भी प्राप्त कर सकता है। जिन्दगी भगवान की � read more >>
तुम हीर से कम नहीं तूं मिलो या न मिलो, मुझे गम नहीं पर यह सत्य है, तुम हीर से कम नहीं। कब तक रोक पाओगी, मेरा प्यार तेरे लिए ही है। तुम नह� read more >>
जख्मों का सिलसिला कुछ इस कदर जख्मों का सिलसिला शुरू हुआ है, एक के बाद एक नए रूप में दस्तक दे रहा है। सारे सपने रेत की महल की तरह बिखर गए, read more >>
माया अद्भुत जादू सा है ,समय = समय का खेल l हुनर मंद जिल्लत में जीते,चौर पुलिस का मेल l आज साधु डाकू बनते हैं, डाकू बनते संत = घर में � read more >>
श्रम साधक का बहे पसीना श्रम साधक का बहे पसीना,नित्य जलाता खून l सेठ लोग सुख को पाता है,पाता बड़ा सुकून l पर श्रम साधक तो दुख झेले,क read more >>
अपनों का जब साथ अब तो धोखा सा है लगता,अपनों का जब साथ l काम निकल जब जाता है तो,खींच रखे तब हाथ l मिले दर्द अक्सर अपनों से,दुश्मन फिर � read more >>
कार्तिक पूनम का चाँद है आज अपने शबाब पर l आज की रात को नाज है अपने महताब पर l जन्नत बनी है आज धरती हैरान है आज स्वर्ग भी_ लोगों में read more >>

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