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संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

संदीप कुमार सिंह

@ sandeep-kumar-singh
, Bihar

I am a writer and social worker.Poems are most likeble for me.

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पानी पानी हो रहा, मौसम है बरसात। सावन भी अब जोर में, हुई सुहानी रात।। पानी पानी हो रहा,भले लोग जो आज। निर्लज खाया लाज को,करता भी है राज।� read more >>
(मुक्तक छंद) अपने जज्बातों को मैं यहां अंकित कर रहा हूं। मोती जैसे अल्फाजों से दास्तान लिख रहा हूं। जिन्दगी सु:ख_दुःख का एक अद्भुत संग read more >>
(दोहा छंद) मन में जब दृढ़ लगन हो,मंजिल मिले जरूर। फिर तो यहां मिशाल बन,दुनिया को दें नूर।। रहें तैयार हर घड़ी,मंजिल मिले जरूर। यहां अस� read more >>
प्यार से पेश आया करो, दिल सदा ही लगाया करो। प्रेम की जोत को साथ रख, दीप को तुम जलाया करो। खास बन अब जहाँ में जरा, तिमिर को पर भग� read more >>
ज़िन्दगी का सफर सफ़र यह बहुत ही है रोमांचक, फूलों की बगिया सी । बहुत ही सुन्दर और है लाजवाब, चारों दिशाओं में संबंधियों का, अप� read more >>
जिस मोड़ पर सब लूट जाता है। अपना भी पराया हो जाता है। उस मोड़ से भी हम गुजरे हैं_ फिर हौसला ही साथ दे जाता है।। (स्वरचित मौलिक) read more >>
अपना बना के तो देखो। दिल दे के तो देखो। नजरें मिला के तो देखो। मेरी सूरत तेरे आईना में, नज़र आएगी। अपना बना के तो देखो। सपना स� read more >>
मानसून घनघोर गर्जन करते हुए, मोतियों की झालरों से सजे हुए, बादलों के मतवाले सवारी पर सवार, नभ में विद्युत की जगमगाहट के साथ, छ� read more >>
प्रीति_प्रीति प्रीति है इस जहाँ से, प्रेम और श्रधा भी है। निर्मल हृदय मचल_ मचल कह रही है, थोड़ा और जीने दे मुझे। बहुमूल्य जीवन � read more >>
है बहुत प्रत्यक्ष पर दिखता नहीं है | कर्म है प्रारब्ध पर लिखता नहीं है | काम भी चलता नहीं उसके बिना | वाम हो यह काल या फिर दाहिना | अस्मित� read more >>

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