नारी झुकती नहीं किसी के आगे,
पर बिछ जाती है अपनों के आगे ।
अपने सपनो को पलकों से उतरने देती ही नही,
दूसरो को खुशी देने के लिए,
दबा देती ह� read more >>
(छंद मुक्त कविता)
आ तुझको तोहफ़ा दूं प्यार भरे गीतों का,
आ तुझको तोहफ़ा दूं मस्ती भरी मितों का।
आ तो सही एक बार आ तो जरा,
फिर फ़ैसला करना � read more >>